Sunday, 24 February 2013

LET YOUR DREAMS ALIVE. PROTECT THEM FROM BEING DISAPPEARED AS YOU GROW.


जब कभी भी मैं अपने जीवन के उद्देश्य के बारे में सोचता हूँ तो असमंजस में पड़ जाता हूँ ।आखिर हम लोगो के जीवन का उद्देश्य क्या है एक सफल जीवन जीना या एक सफल व्यक्ति बनना, या इन दोनों ही बातो में कोई अंतर नहीं । अगर सही मायने में देखा जाये तो हमारे देश में सभी लोगो का सिर्फ एक ही सपना है हर सूरत में खुश रहना ।

लेकिन आज में आपका परिचय एक ऐसी जोड़ी से करवाना चाहूँगा जो कुछ अलग है , जिसका सपना हम सब लोगो से कुछ ज्यादा ही हट के है , और वो रात दिन उस सपने को साकार करने में लगे हुए है। ये वो दो लोग है जिनके बारे में बहुत ही कम लोगो को पता होगा और सच बोलू तो कल तक मुझे भी इनके बारे में नहीं पता था । मैं बात कर रहा हूँ चारुल और विनय की ।

चारुल और विनय वो लोग है जिनके लिखे हुए गाने " जानने का हक " को RTI के गान के रूप में चुना गया । चारुल और विनय ने 1992 में लोगो के बीच अहिंसा और शांति की भावना का संचार करने के लिए  " लोकनाद " नाम का एक फोरम शुरू किया। ये जोड़ी लगभग 50  गाने हिंदी, पंजाबी और गुजराती में लिख चुकी है। इन दोनों का प्रमुख उद्देश्य देश में लोगो के बीच जागरूकता फैलाना है । लोगो के बीच से जाति , धर्म ,भाषा का भेद मिटाना है । इनके बहुत से गाने अधिकारहीन लोगो को उनके हक दिलाने के ऊपर निर्धारित है ।

विनय एक एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग स्नातक है और IIM-A से भी पढाई कर चुके है । उनकी साथी चारुल एक आर्किटेक्ट है । IIM -A  से पढाई करने के बावजूद भी विनय ने mercedes , BMW , में घूमना , 5 स्टार घर में रहने का सपना न देखकर कर लोगो के जीवन को बेहतर बनाने का सपना देखा । सारे सुखो को दरकिनार करते हुए हाथ में डफली लिए निकल पड़े लोगो के जीवन को दिशा देने के लिए । इसमें उनका साथ दिया उनकी साथी चारुल ने।

न जाने इंसानियत का कौन सा चोला इन लोगो ने पहन लिया है, जो अपने सुखो को दाव पर लगा कर ये  रात दिन लोगो के जीवन को बेहतर बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे है । मातृभूमि का कौन सा रंग इनके ऊपर चढ़ गया है जो सांसारिक मोह माया और सुख की चाह भी इनके आस पास नहीं भटकती।

इनके बारे पढ़ा तो मन में यही सवाल आया की क्या ये लोग सफल है ? इनके लिए सफलता की क्या परिभाषा है ?  क्या अपने सपने को पूरा करना ही सफलता की परिभाषा है चाहे उसमे सुख चेन हो या न हो ?  लोगो के दुःख दूर करने को , इन दोनों की तरह ही हम सभी लोग अपनी सफलता मानने लगेंगे तो शायद बहुत ही जल्दी हमारे देश के हर एक नागरिक के जीवन में खुशाली होगी ।  उस वक़्त भले ही हम सब सफल न कहलाये लेकिन हमारा देश एक सफल देश कहलायेगा ।

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