Sunday, 21 April 2013

RELIGION : A PRACTICAL APPROACH


धर्म एक ऐसा धागा है जिससे हर व्यक्ति बंधे रहना चाहता है । धर्म के सहारे ही लोगो के जीवन को दिशा दी जा सकती है । हमारे देश का हर व्यक्ति मैं कहूँगा पुरे १०० प्रतिशत लोग कुछ न कुछ ऐसा करते है जिसके पीछे एक मात्र कारण धर्म है उससे ज्यादा कुछ नहीं ।

धर्म किसी आकाश से अवतरित हुयी पुस्तक का सारांश नहीं है और न ही ये कोई अंधविश्वास है । धर्म तो हमारे पूर्वजो के लाखो वर्षो  के शोध का एक अच्छा और सुंदर परिणाम है  और हमें अपने पूर्वजो का आभारी होना चाहिए क़ि हमारे जीवन को सरल और सुखी बनाने के लिए उन्होंने इतनी महनत की । सही अर्थो में देखा जाये तो धर्म  जीने का एक तरीका है । मैं एक छोटा सा उदाहरण देना चाहूँगा । हिन्दू धर्म के लोग गंगा नदी में सिक्के डालते है , पहले तो मैं भी समझ नहीं पाया था की ऐसा भला क्यों किया जाता है । लेकिन मैं आपको बता दूँ की नदी में सिक्के डालने का कारण मनुष्य के जीवन से ही सम्बंदित है । पुराने ज़माने में सिक्के ताम्बे के हुआ करते थे और ताम्बे के बर्तन में रखा हुआ पानी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है । बस उसी कारण से आज जब सिक्के ताम्बे के नहीं है फिर भी गंगा नदी में डाले जाते है । इसी तरह इस्लाम में पढ़ी जाने वाली नमाज , कुछ ऐसे योगासनों का संग्रह है जिसे अगर व्यक्ति दिन में पांच बार कर ले तो जिंदगी भर निरोगी रहे । धर्म चाहे कोई भी सभी का उद्देश्य इंसानियत की रक्षा करना है , इंसान को एक सुखी जीवन देना है । दो अलग अलग धर्मो की कोई भी बात या उपदेश एक दुसरे के विपरीत नहीं होते ।

अब सवाल खड़ा होता है क़ि अगर  धर्म इंसान के हक के लिए है तो फिर धर्म के कारण इतने दंगे फसाद क्यों होते है ? क्यों किसी धर्म का पालन करने में इतनी मसक्कत करनी पड़ती है ? क्यों धर्म के कारण कभी कभी गर्मी में भी पुरे बदन पर मोटा लिबास पहना पड़ता है ? कारण है हम लोगो के धर्म गुरु जो हमें दिशा देते है जो हमारे धर्म में क्या होना चाहिए क्या नहीं इस बात का फैसला करते है ।

क्योकि धर्म इंसान के जीवन को सुखी बनाने के लिए है इसीलिए समय के साथ इसमें बदलाव  क़ि जरुरत थी। वो बदलाव करना भी आसान नहीं है पुरे शोध के बाद ही बदलाव किया जा सकता है । और हमारे धर्म गुरुओं को तो धर्म के नाम पर अंधविश्वास फेलाने से ही फुर्सत नहीं है शोध कहा से करेंगे । जिस प्रकार सिक्के का धातु (जिसका सिक्का बनता है ) के बदलने के साथ ही नदी में सिक्के डालने क़ी परंपरा को बदलना जरुरी था उसी प्रकार हर धर्म में समय के साथ बदलाव लाना जरुरी है । धर्म में बदलाव लाने से ही उसके उद्देश्य क़ी रक्षा क़ी जा सकती है ।

धर्म का उद्देश्य कभी भी लोगो के बीच दीवार खड़ा करना नहीं है अपितु धर्म तो लोगो को मिलाता है , एक दुसरे के सुख दुःख को समझे क़ी प्रेरणा देता है । इसिलए आज जरुरत है क़ि हमारे धर्म गुरु सभी प्रकार क़ी राजनीति से मुक्त होकर धर्म में जरुरी बदलाव लाये ।
  

Friday, 12 April 2013

IS CORRUPTION A MAIN PROBLEM OF OUR COUNTRY ?

करप्शन यानि के भ्रष्टाचार एक ऐसा शब्द है जिससे देश का हर नागरिक भली भाति वाकिफ है , देश का हर एक नागरिक भ्रष्टाचार को जानता है समझता है और उसके हर एक रूप को पहचानता है लेकिन फिर भी जाने क्यों इसकी मात्रा में तनिक भी कमी नहीं आती जितने ज्यादा लोग भ्रष्टाचार से दिन पे दिन अवगत हो रहे है ये उतना ही बढता जा रहा है दिल्ली में अन्ना जी का आन्दोलन हुआ , अरविन्द जी भूखे प्यासे शासन से लड़े लेकिन भ्रष्टाचार में फिर भी कोई कमी नहीं आई इतने ज्यादा मात्रा में लोगो ने अरविन्द जी का साथ दिया , भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाई लेकिन जाने उनकी आवाज़ दानव की किस दहाड़ ने दवा दी

मेरा देश शायद ही भ्रष्टाचार से आजाद हो पाए क्योकि भ्रष्टाचार मेरे देश कि मुख्य समस्या है ही नहीं   मेरे देश कि मुख्य समस्या है, तो हम सब देश वासियों कि देश भक्ति आज देश भक्ति के नाम पर सिर्फ लोग २६ जनवरी और १५ अगस्त हो तिरंगा फेहराते है और जो ज्यादा देश भक्त होते है वो दिल्ली जाकर परेड भी देखते है मैं पूरे दावे से कह सकता हूँ कि जितने लोग अन्ना जी के अगस्त आन्दोलन में आये थे अगर उतने ही लोग आन्दोलन में आने कि बजाये, भ्रष्टाचार करने का प्रण लेकर उस पर अमल करते तो शायद, कम से कम दिल्ली से तो भ्रष्टाचार निश्चय ही कुछ कम हो जाता

आज हम अपने देश से ज्यादा अपनी जाति , अपने धर्म , अपने समुदाय , अपने क्षेत्र , अपनी भाषा (जो आधे से ज्यादा भारतियों की हिंदी नहीं है ) प्यार करते है सबसे कम अगर हम किसी को प्यार करते है तो शायद वो अभागा देश ही है देश जनसंख्या विस्पोट के नज़दीक है लेकिन हम अपनी कॊम , अपने लोग, अपने समुदाय की तरक्की और सुरक्षा का हवाला देते हुए ऐसा कोई कदम उठाने को तैयार नहीं जिससे उसकी वृद्धि में कुछ कमी आये