Monday, 11 February 2013

Letter to Parents of children (Katihar Bihar)

Letter to parents of Children :



आदरनिये परिजनों
प्रणाम
हमारे गाँव में सरस्वती आश्रम नाम से एक शिक्षा केंद्र श्री सत्यजीत जी द्वारा चलाया जा रहा है, जिसका उदेश्ये लडकियों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करना है ताकि हमारे गाँव की लड़कियां भी पढ़ लिख सके, इस संसार की मुस्किल से मुस्किल चीजों को समझ सके और हर परिस्थिति का सामना कर सके आज के समय में शिक्षा हर किसी के जीवन में रोटी कपडे और मकान जितना महत्व रखती है। कहने का तात्पर्य यह है की शिक्षा जीने के लिए अनिवार्य हैं। जिस प्रकार एक कुम्हार कच्ची मिटटी को आकर देता है और आग में तपा कर उस आकर को मजबूती प्रदान करता है, उसी प्रकार शिक्षा हमारे जीवन को एक मजबूत और सही आकार प्रदान करती हैं शिक्षा व्यक्ति को सही और गलत में फर्क करना सिखाती है। इसीलिए हम देखते है की शिक्षित व्यक्ति एक आछा जीवन जीते है अपितु उनके जो शिक्षित नहीं है। शिक्षा के बिना व्यक्ति कच्ची मिटटी के सामान है जिसको किसी भी आकर में ढला जा सकता है चाहे वो गलत हो या सही

जब भी में लड़कियों की शिक्षा के बारे में सोचता हूँ तो कुछ नाम मेरे दिमाग में घूमने लगते है जैसे किरण बेदी, सायना नेहवाल,कल्पना चावला आदि। इन सभी ने अपना नाम पूरी दुनिया में रोशन किया केवल शिक्षा के बल पर
कुछ लोगो के पास पैसा होता है, कुछ के पास जमीन जय्जात होती है लेकिन सबसे ज्यादा आमिर और भाग्यशाली वो होता है जिसके पास शिक्षा होती है। एक शिक्षा ही है जो गरीब से गरीब को भी आमिर बना सकती है। शिक्षा का इतना मूल्य है की उससे दुनिया का हर सुख ख़रीदा जा सकता है।

आइये अब थोडा अपने देश की हालत पर एक नज़र डालते है हमारे देश में ५० % से भी आधिक लडकिय ऐसी है जिन्होंने अपने जीवन में स्कूल की चोखट तक नहीं देखी है। और उससे भी आधिक लडकिय ऐसी है जो सिर्फ आठवी तक पढ़ी है। कहने का मतलब है समाज का एक हिस्सा कमज़ोर होता जा रहा है। और इन सब का कारण कही न कही हम लोगो की अज्ञानता है। कहने को तो ये कारण बहुत छोटे है लेकिन हम लोगो की मानसिकता कुछ इस प्रकार की हो गयी है की इन कारणों का निवारण कुछ असंभव सा प्रतीत है । हम रोज़ अख़बार में घरेलु हिंसा की खबरे पड़ते है , में आपको ये बता दो की घरेलु हिंसा का सिर्फ एक ही कारण होता है और वो है " पति की ख़राब आदतें और पत्नी का पति पर जरूरत से ज्यादा निर्भर होना " । पत्नी का पति पर निर्भर होने का कारण ज्यादातर उसकी अशिक्षा होती है। अशिक्षा के कारण लड़कियां कही भी जाने से डरती है और कई बार वो उस वक़्त भी अपनी आवाज़ नहीं उठती जब उनके साथ कुछ गलत हो रहा होता है। हम लोग लडकियों से उनका शिक्षा का हक छीनकर एक तरह से उन्हें नरक की तरफ धकेलते है।

बहुत सरे माता पिता बहुत अभागे होते है जो चाहकर भी अपने बच्चो को गाँव में स्कूल होने के कारण,शिक्षा नहीं दे पाते , कुछ माता पिता को बच्चो की पड़ी के लिए अपना घर जमीन सब बेचना पड़ता है लेकिन इन सब में सबसे ज्यादा अभागे वो होते है जो मुफ्त में मिल रही शिक्षा को भी अपने बाचो को नहीं दिलवा पाते है।

मैं आप सभी से यही कहना चाहूँगा की हमे अपने बच्चो को पढ़ाने का कोई भी मौका छोड़ना नहीं चाहिए। तो आइये ये जाने की आखिर हमारे बच्चे शिक्षित कैसे बनेंगे। यहाँ पर में लड़कियों की बात करूँगा। लड़कियों की पढाई में सबसे बड़ा रोड़ा है घर का काम,  यहाँ मेरे कहने का तात्पर्य यह नहीं है की लड़कियों को घर का काम करना ही नहीं चाहिए बल्कि घर के काम का एक समय निर्धारित होना चाहिए। घर के काम का एक समय रहेगा तो लडकियां , घर के काम के साथ साथ स्कूल का काम भी कर पाएंगी घर के काम का समय स्कूल के समय के साथ हो साथ ही हमें इस बात का भी ध्यान रखना पड़ेगा की लडकियां रोज़ स्कूल जा रही है या नहीं अब सवाल उठता है की गाँव में स्कूल कहाँ है, हम सभी जानते है की आठवी से आगे का स्कूल गाँव से काफी दूर है इसलिये मेरी आप सब लोगो से प्रार्थना है आप सब अपनी लड़कियों को सत्यजीत जी द्वारा चलाये जा रहे आश्रम में पढने के लिए भेजे और जो भी मुश्किल रही है उसमे अपने बच्चो का साथ दे
शिक्षा लड़कियों को उनके पैरो पर खड़े होने ही शक्ति देगी और इनके जीवन को गति प्रदान करेगी। आप सब प्रयास करेंगे तो भविष्ये में हम लोग देखेंगे की हमारे गाँव की लडकियां एक सुखद जीवन व्यतीत कर रही है। शिक्षा इनको सही और गलत समझने की सकती देगी। कोई भी इनके साथ कुछ भी गलत करने से डरेगा। ये पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर हो जाएँगी। इसलिये मेरा आप सबसे निवेदन है की आप सब लड़कियों को पढने के लिए प्ररित करे और उनकी पढाई में आने वाली हर कठनाई को दूर करे सत्यजीत जी द्वारा चलाये जा रहे आश्रम का समर्थन करे
किसी भी बच्चे के लिए चाहे वो लड़का हो या लड़की शिक्षा से बड़ा उपहार कुछ नहीं हो सकता। किसी को शिक्षित करना एक गौरव की बात है और जिस दिन आपका बच्चा या बच्ची पढ़ लिखकर कुछ बन जायेगा  उस दिन आपकी छाती गर्व से चोडी हो जाएगी। आइये हम सब आपने बच्चो को शिक्षित बनाकर इस देश की तरक्की का हिस्सा बने

आखिर में भगवान से यही प्रार्थना करूँगा  की आप सब लोग सत्यजीत जी का साथ दे और गाँव की तरकी का हिस्सा बने
"माँ बच्चे की पहली टीचर होती है उसके शिक्षित होने से ही समाज में संस्कार का संचार होता है "
प्रणाम

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